क्यों है आरती हर पूजा का अहम हिस्सा?

क्यों है आरती हर पूजा का अहम हिस्सा?

आरती क्या है? | What is Aarti?

आरती हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण पूजा विधि है, जिसमें दीपक या कपूर जलाकर भगवान की स्तुति की जाती है। यह न केवल भक्त और ईश्वर के बीच एक आध्यात्मिक सेतु का कार्य करती है, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा को भी आकर्षित करती है।

आरती का महत्व | Importance of Aarti

  1. सकारात्मक ऊर्जा का संचार (Flow of Positive Energy): आरती के दौरान कपूर और घी के दीपक जलाने से वातावरण शुद्ध होता है और सकारात्मक ऊर्जा फैलती है।

  2. मन की शांति (Peace of Mind): आरती के मंत्रों की ध्वनि से मानसिक शांति प्राप्त होती है।

  3. नकारात्मक ऊर्जा का नाश (Removal of Negative Energy): आरती करने से घर और मंदिर में नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।

  4. ईश्वर का आशीर्वाद (Divine Blessings): आरती से भगवान की कृपा प्राप्त होती है।

आरती के पीछे की आध्यात्मिक ऊर्जा | Spiritual Energy Behind Aarti

  1. ध्वनि ऊर्जा (Sound Energy): मंत्रों के उच्चारण से सकारात्मक ध्वनि तरंगें उत्पन्न होती हैं, जो शरीर और मन को शुद्ध करती हैं।

  2. प्रकाश ऊर्जा (Light Energy): दीपक की लौ ध्यान केंद्रित करने में सहायता करती है और मन को एकाग्रचित्त बनाती है।

  3. सुगंधित ऊर्जा (Fragrance Energy): कपूर और घी के जलने से उत्पन्न सुगंध वातावरण को दिव्यता से भर देती है।

  4. चेतना का जागरण (Awakening of Consciousness): आरती करते समय भक्त की चेतना आध्यात्मिक ऊर्जा से भर जाती है।

आरती थाली में वस्तुओं का महत्व | Significance of Items in Aarti Plate

  1. दीपक (Lamp): ज्ञान और प्रकाश का प्रतीक, जो अज्ञानता को दूर करता है।

  2. कपूर (Camphor): आत्मा की पवित्रता और अहंकार के नाश का प्रतीक।

  3. अगरबत्ती (Incense Sticks): वातावरण को सुगंधित और सकारात्मक ऊर्जा से भरने के लिए।

  4. फूल (Flowers): भगवान के प्रति श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक।

  5. शंख (Conch): इसकी ध्वनि से नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है।

  6. घंटी (Bell): मन को एकाग्र करने और आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ाने के लिए।

  7. रोली-कुमकुम (Vermilion): मंगलता और शुभता का प्रतीक।

आरती करने का सही समय और दिशा | Best Time and Direction for Aarti

  • प्रातःकाल और संध्या काल में आरती करना सबसे शुभ माना जाता है।

  • पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा की ओर मुख करके आरती करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं।

निष्कर्ष | Conclusion

आरती केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत भी है। यह न केवल मन की शांति प्रदान करती है, बल्कि घर एवं वातावरण को शुद्ध भी करती है। आरती से संबंधित पेंटिंग्स और वास्तु शास्त्र के नियमों को अपनाकर हम अपने जीवन में और अधिक सकारात्मक ऊर्जा ला सकते हैं।

Short Questions and Answers

  1. आरती क्या होती है?
    आरती एक धार्मिक अनुष्ठान है जिसमें दीप जलाकर भगवान की स्तुति की जाती है।

  2. आरती का महत्व क्या है?
    आरती से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, मन को शांति मिलती है और नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है।

  3. आरती किस दिशा में करनी चाहिए?
    पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा में आरती करना शुभ माना जाता है।

  4. आरती थाली में कौन-कौन सी वस्तुएं होती हैं?
    दीपक, कपूर, अगरबत्ती, फूल, शंख, घंटी, और रोली-कुमकुम।

  5. आरती कब करनी चाहिए?
    प्रातः और संध्या समय आरती करना सबसे शुभ होता है।

  6. कपूर जलाने का आध्यात्मिक महत्व क्या है?
    कपूर जलाने से वातावरण शुद्ध होता है और नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है।

  7. आरती में दीप जलाने का क्या लाभ है?
    दीपक जलाने से अज्ञानता का नाश होता है और ज्ञान का प्रकाश फैलता है।

  8. आरती के दौरान शंख बजाने का क्या महत्व है?
    शंख की ध्वनि से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और वातावरण शुद्ध होता है।

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